Tuesday, 25 June 2013

કર્મસકલ તવ વિલાસ - ભજન

એક સુંદર ભજન છે. હરિ કૃપાથી વ્યક્તિ શું કરી શકે તેનું સુંદર વર્ણન છે.

સ્વર - જગજિતસિંહ

कर्म सकल तव विलास, लोक अहम केवल हास ।

हस्ती किच बिच ड़ारो, पंगु पार गिरी साहास ।
प्रभु पद में कोई बैठावो, पतित का तो हक उलास ।

यंत्र बद्ध किनी मोहे, चलत करो नव प्रगास ।
तू धर्मी देह माही, फैलावो चो दिस उजास ।

रथ समान मोही बनाए, चलावो हाथ तुमरे रास ।
करो कर्म अपनी और, ढूँढो सकल जग की आस ।

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